जम्मू कश्मीर बोर्ड जल्द जारी करेगा परीक्षा परिणाम के मापदंड

जम्मू कश्मीर बोर्ड आफ स्कूल एजुकेशन ने 12वीं और 10वीं कक्षा की परीक्षा के परिणाम के लिए मापदंड बनाने शुरू कर दिए हैं। बोर्ड पहले ही 10वीं कक्षा की परीक्षा को रद कर चुका है, लेकिन परिणाम घोषित करने के मापदंड तैयार नहीं हुए हैं। 10वीं कक्षा के दो पेपर हुए थे। उसके बाद कोरोना की दूसरी लहर से हालात खराब हो गए। बोर्ड ने 10वीं कक्षा की परीक्षा को रद कर दिया। अब बोर्ड ने दसवीं कक्षा का परिणाम घोषित करना है। इसमें सबसे अहम कार्य मूल्यांकन है।
बोर्ड दसवीं कक्षा के पहले दो पेपरों के प्रदर्शन पर शेष बचे तीन पेपरों का मूल्यांकन कर सकता है। इसमें एक अन्य व्यवस्था यह भी की जा सकती है कि नौंवी कक्षा के अंकों के मूल्यांकन को भी पचास फीसद तक आधार बनाया जाए। बोर्ड में विशेषज्ञों की टीम इस पर काम कर रही है। मापदंड ऐसे बनाए जा रहे है जिससे विद्यार्थियों को कोई नुकसान न पहुंचे।अब बारहवीं कक्षा की परीक्षा भी रद होनी तय है क्योंकि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बारहवीं कक्षा की परीक्षा को रद कर दिया है। देश के अन्य कई राज्य भी बारहवीं कक्षा की परीक्षा को रद कर चुके है।
जम्मू संभाग के समर जोन में करीब चालीस हजार विद्यार्थी बारहवीं कक्षा और पचास हजार से अधिक दसवीं कक्षा के है। 12वीं के भी कुछ पेपर हुए थे जिसके बाद अन्य पेपर स्थगित किए गए थे। बोर्ड परिणाम घोषित करने के लिए काम कर रहा है इसमें क्या दसवीं, ग्यारहवीं कक्षा के अंक आधार हो सकते है या कुछ आबजेक्टिव आनलाइन लिए जा सकते है। पूरा मसौदा बनाकर शिक्षा विभाग को सौंपा जाएगा। बोर्ड की चेयरपर्सन प्रो. वीना पंडिता का कहना है कि हम पूरा प्रस्ताव बनाकर सरकार को सौंपेंगे। इसमें तीन चार दिन का समय लगेगा। परीक्षाओं पर अंतिम फैसला तो सरकार को लेना है। सूत्र बताते है किबोर्ड जल्द ही पूरे मापदंड बनाकर उपराज्यपाल को सौंपेगा।इसमें ग्यारहवीं कक्षा को लेकर भी स्थिति को स्पष्ट किया जाएगा। ग्यारहवीं कक्षा में मॉस प्रमोशन होने की संभावना है।
विशेषज्ञों की राय में प्रिंसिपल कुलदीप सिंह बंदराल का कहना है कि दसवीं हो या बारहवीं कक्षा की पेपरों के मूल्यांकन का फार्मूला बोर्ड कुछ दिनों में जारी कर देगा। पहले हुए पेपरों के अंकों के आधार पर ही अन्य नहीं हुए पेपरों के अंक दिए जाते है। अगर दसवीं के दो पेपर हुए हैं तो दोनों के अंकों का औसत निकल कर तीसरे पेपर को अंक दिए जाते है। इस तरह से तीनों के अंकों का औसत निकल कर चौथे को भी उतने ही अंक दिए जाते है। इस तरह का सिस्टम को ही लागू किया जाता है क्योंकि मौजूदा समय को ध्यान में रखकर ही ऐसा ही सिस्टम अपनाए जाने की संभावना है। फैसला तो बोर्ड और सरकार ने ही करना है।
हायर सेकेंडरी स्कूल छन्नी हिम्मत में इक्नामिक्स की लेक्चरर नीतू रंधावा का कहना है कि इसके लिए बोर्ड मापदंड तय करता है। पिछली बार तो पहले लिए गए पेपरों के आधार पर औसत निकल कर अन्य पेपरों के अंक दिए गए थे। इस बार भी ऐसा ही होने की संभावना है। विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए परीक्षाएं रद की गई है। बारहवीं कक्षा को लेकर सरकार ने अभी फैसला करना है।
हायर सेकेंडरी स्कूल भलवाल के प्रिंसिपल किशोर शर्मा का कहना है कि आम तौर पर इस हालात में पहले हुए पेपरों या पिछली कक्षा और असाइनमेंट में आए अंकों को आधार बनाकर ही परिणाम निकाला जाता है। इसके अलावा कोई और खास विकल्प नहीं होता है। फिर भी इस संबंध में फैसला तो बोर्ड ने ही करना हाेता है।



